थक के लौटा हूं दिन भर की कश्मकश से
यकीन है, तुमसे तो रु बरु हो पाऊंगा
जिन्दगी की भीड़ में आज मिला था कइयों से
पर मुलाकातों का इल्म, तुमसे तो कह पाऊंगा
English And Hindi Poetry
थक के लौटा हूं दिन भर की कश्मकश से
यकीन है, तुमसे तो रु बरु हो पाऊंगा
जिन्दगी की भीड़ में आज मिला था कइयों से
पर मुलाकातों का इल्म, तुमसे तो कह पाऊंगा