
रुखसत नसीब हुई है रंजो गम की महफिलों से तुम्हें
दीदार करना है, अब नयी मंजिलों का तुम्हें
मंजिलों से कोई फासला ना रखना
जरूरत पडे तो सिर्फ़ बेहिसाब हौसला रखना
अपनी ख्वाहिशों को ग़र कुछ धुंधलाना भी पड़े
मंज़िल हासिल करने का गर्व और फर्ज़ सदा बनाए रखना
English And Hindi Poetry

रुखसत नसीब हुई है रंजो गम की महफिलों से तुम्हें
दीदार करना है, अब नयी मंजिलों का तुम्हें
मंजिलों से कोई फासला ना रखना
जरूरत पडे तो सिर्फ़ बेहिसाब हौसला रखना
अपनी ख्वाहिशों को ग़र कुछ धुंधलाना भी पड़े
मंज़िल हासिल करने का गर्व और फर्ज़ सदा बनाए रखना