
मृगनयनी तो सिर्फ एक नाम है
तेरे नयन तो मदहोशी भरा एक जाम है
माथे की बिंदिया क्या खूब मुस्कुराती है
इस शायर की बेसब्र कलम खुलवाती है
English And Hindi Poetry

मृगनयनी तो सिर्फ एक नाम है
तेरे नयन तो मदहोशी भरा एक जाम है
माथे की बिंदिया क्या खूब मुस्कुराती है
इस शायर की बेसब्र कलम खुलवाती है