बरसात की मौजों मे अकड़ी खिड़कियां
जो खींचे नहीं खिंचती
कारीगर के एक रंधे की मोहताज होती है बस
जो उन्हे कोमल कर जिन्दगी के मायने बता जाता
English And Hindi Poetry
बरसात की मौजों मे अकड़ी खिड़कियां
जो खींचे नहीं खिंचती
कारीगर के एक रंधे की मोहताज होती है बस
जो उन्हे कोमल कर जिन्दगी के मायने बता जाता