चराग आफताब गुम
बड़ी अजीब बात है
महक गुलाब में भी कम
बड़ी अजीब बात है
हूँ चार दोस्तों मे भी चुप
बड़ी अजीब बात है
है चाँद खिला पर रोशनी नहीं
बड़ी अजीब बात है
हवा चले, और खामोश है पात
बड़ी अजीब बात है
बारिश का जोर, और ये प्यास
बड़ी अजीब बात है
जवां महफिलों मे तन्हा से हम
बड़ी अजीब बात है
दौरे जश्न और बीमार ये मन
बड़ी अजीब बात है