ना फेरो नज़रें October 16, 2018 sanjay Hindi Poetry ना फेरो नज़रें हम से तुमजुल्फें भी तो मुड़ जाती हैंचेहरा भी हो जाता है ओझलसिर्फ मुस्कान ही नहीं जाती है