दोपहर की धूप थी
छत पे जा,
दीवार के कोने तक पहुंचने के लिए
पैरों के तलवों को जला डाला
दर्द वो इश्क़ का था
समय उसके घर लौटने का था
जलन मीठी सी लग रही थी
उसके दीदार की खुशी जो महक रही थी
English And Hindi Poetry
दोपहर की धूप थी
छत पे जा,
दीवार के कोने तक पहुंचने के लिए
पैरों के तलवों को जला डाला
दर्द वो इश्क़ का था
समय उसके घर लौटने का था
जलन मीठी सी लग रही थी
उसके दीदार की खुशी जो महक रही थी