
मैंने एक गुलाब भेजा उसको
गुलाब की तस्वीर मात्र थी
गुलाब को ना फेंक सका
दोस्त को दिया, कहकर की तू भी भेज
गुलाब किसी चाहने वाले ने उठाया
क्यूंकि उसने वो चलती पगडंडी पे फेंका पाया
उसने एक कद्र की
गुलाब को फिर महकाया
ये हुआ
की वो मुझसे मिल पाया
गुलाब कद्रदान के हाथों मे अब, एक चक्र घूम आया