चुप चाप हूँ मैं, पर तुमसे नाराज बिल्कुल भी नहीं
चुप चाप हूँ मैं पर जेहन मे शोर बहुत गहरा है
बस इन शोर करती आवाजों, को सुलझा रहा हूँ मैं
बीच समंदर के तूफानों से, किनारे पहुंचने मे अभी वक़्त लगेगा
चुप चाप हूँ मैं, पर तुमसे नाराज बिल्कुल भी नहीं
English And Hindi Poetry
चुप चाप हूँ मैं, पर तुमसे नाराज बिल्कुल भी नहीं
चुप चाप हूँ मैं पर जेहन मे शोर बहुत गहरा है
बस इन शोर करती आवाजों, को सुलझा रहा हूँ मैं
बीच समंदर के तूफानों से, किनारे पहुंचने मे अभी वक़्त लगेगा
चुप चाप हूँ मैं, पर तुमसे नाराज बिल्कुल भी नहीं