तेरी रम्ज़
तेरी रम्ज़ से क्या मैं हूँ वाकिफ नहीं अब तलकबिछौना भी बिछाती हो उस रम्ज़ का दोहर सो अलग
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तेरी रम्ज़ से क्या मैं हूँ वाकिफ नहीं अब तलकबिछौना भी बिछाती हो उस रम्ज़ का दोहर सो अलग
Read moreतेरी आँखों ने मेरी तकदीर लिख दी हैतस्वीर छप गयी है, ता उम्र जीने के लिए
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गहरी स्याही से लिखी वो ख्वाहिशेंगुजरे सालों के बाद, फीकी दिख रही हैंकुछ अंश बचे हैं, अभी मिटी नहीं हैंज़ेहन Continue Reading ...
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मिट्टी से ना बनाओ, अपने इरादों का स्तंभमौसम कल बदलेगा, तूफान, बारिश ना सह पाएंगेटूट जाएंगे, बह जाएंगेबिन इरादों के Continue Reading ...
Read moreकिस शायर से इल्म लूँ मैं अब दो लफ्ज़ लिखने कालफ़्ज़ों का दरिया, तन्हा दिल के कोनों से उमड़ता है
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