
छुई मुई, छुई मुई,छुई मुई,
छुई मुई सी लगे ये हंसी,
छुई मुई सी लग,जो ना हंसी
पागल, दीवाना बन गया हूं मैं,
आज क्यूँ? ,
क्यूँकि
छुई मुई, छुई मुई,छुई मुई,
छुई मुई सी लगे ये हंसी,
छुई मुई सी लगे ,जो ना हंसी
लट बिखरा के, लहराती चलती,
बिन सावन के निगाहें मचलती.
देखूँ तुझे मैं
दीवानगी की हद से,
महका हुआ है मन,
तेरी खुशबू से,
पागल, दीवाना बन गया हूं मैं,
आज क्यूँ? ,
क्यूँकि
छुई मुई, छुई मुई,छुई मुई,
छुई मुई सी लगे ये हंसी,
छुई मुई सी लग,जो ना हंसी