पुरानी हवेली

पुरानी हवेली के बंद कमरे के कोने में एक अलमारी है
तह बना के वहां ख्वाब रख आए अरसा बीत गया था
आज उन्हें मैं बाहर निकाल लाया हूँ
ख्वाबों में गहरी सिलवटें पड़ गई थी
इस्तरी कर चुका हूं सबको
गहरी स्याही से अंधेरों में अब रोशनी लिख आया हूँ

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