अरमानों को हवा
जिस्म से लहरें टकरा रही थीहौले हौले भीगा रही थीढलते सूरज की शिथिलता दिल को लुभा रही थीरात के आगोश Continue Reading ...
Read moreEnglish And Hindi Poetry
जिस्म से लहरें टकरा रही थीहौले हौले भीगा रही थीढलते सूरज की शिथिलता दिल को लुभा रही थीरात के आगोश Continue Reading ...
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