खता हमसे सिर्फ दो बूंदों की हुई
दो बूंद तब उनकी आंखो से झर रहे थे
जिन्हे हम ने देखा, पर महसूस न किया
घर जाते साकी से हम, दो बूंद, जो मांग रहे थे
English And Hindi Poetry
खता हमसे सिर्फ दो बूंदों की हुई
दो बूंद तब उनकी आंखो से झर रहे थे
जिन्हे हम ने देखा, पर महसूस न किया
घर जाते साकी से हम, दो बूंद, जो मांग रहे थे