
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
अब भी सपनों में खोता है
हर पल में जीवन तू देख
सोच कि ये ग़म तो छोटा है
डूब के हर एक आलम देखा
दिल के मंज़र में सब रक्खा
अब किस धूप की तपिश से डरता है
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
English And Hindi Poetry

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
अब भी सपनों में खोता है
हर पल में जीवन तू देख
सोच कि ये ग़म तो छोटा है
डूब के हर एक आलम देखा
दिल के मंज़र में सब रक्खा
अब किस धूप की तपिश से डरता है
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है