मुद्दतों बाद वाला इब्तिदा October 15, 2019 sanjay Hindi Poetry हवाओं का रंग भी स्याह हो चला थापर मैं रुका ना थाआँखें पूरी खुली पर कुछ दिखता ना थाना रास्ते, ना मंजिल, ना ख़ुद मैंऐसे मैं एक दिन आ ही गयाहवा का रंग बदला, एक बार फिरस्याही छंट चुकी थी,और अब आ चुका थामुद्दतों बाद वाला इब्तिदा