रोशनी हो ना सकी रे साकी
तेरे मयखाने मे घोर अंधेरा था
इस दरवाजे के बाहर निकल के देखा
दिन तो दिन, रातें भी चाँद से रोशन है
English And Hindi Poetry
रोशनी हो ना सकी रे साकी
तेरे मयखाने मे घोर अंधेरा था
इस दरवाजे के बाहर निकल के देखा
दिन तो दिन, रातें भी चाँद से रोशन है