
कठपुतली जैसे, लंबे धागों से बंधा
इंसान नाच रहा है
जीवन भार से तराजू झुक गया है
झुकी हुई रीढ़, अब कब होती सीधी
झुका हुआ इंसान चल रहा है
बोझ की रेहड़ी घर आंगन तक जाती है
ढोना भी अब लाज़मी हो गया है
कठपुतली जैसे, लंबे धागों से बंधा
इंसान नाच रहा है
English And Hindi Poetry

कठपुतली जैसे, लंबे धागों से बंधा
इंसान नाच रहा है
जीवन भार से तराजू झुक गया है
झुकी हुई रीढ़, अब कब होती सीधी
झुका हुआ इंसान चल रहा है
बोझ की रेहड़ी घर आंगन तक जाती है
ढोना भी अब लाज़मी हो गया है
कठपुतली जैसे, लंबे धागों से बंधा
इंसान नाच रहा है