बुलंद पत्थरों की ऊंची हवेली रही होगी
सिमटे हुए ईंट पत्थर आज भी अनछुए है
पर वक़्त आने का इंतजार रखते हैं
एक दिन सबका वजूद अस्त होना है
English And Hindi Poetry
बुलंद पत्थरों की ऊंची हवेली रही होगी
सिमटे हुए ईंट पत्थर आज भी अनछुए है
पर वक़्त आने का इंतजार रखते हैं
एक दिन सबका वजूद अस्त होना है