
तूफान उठा है तो कश्ती की पतवार संभाले हम
ज़ोर से खेते जा रहे है
मंज़िल नज़र ना आती, दूर है मगर
धीरे ही सही, उस ओर बढ़े जा रहे हैं
English And Hindi Poetry

तूफान उठा है तो कश्ती की पतवार संभाले हम
ज़ोर से खेते जा रहे है
मंज़िल नज़र ना आती, दूर है मगर
धीरे ही सही, उस ओर बढ़े जा रहे हैं