
दिल के आँसुओं से बने मोती,
मोतियों को सहेज एक एक कर,
माला में पिरोता गया हूँ,
बन न सकी, गले का हार
ये जयमाल छिपाता रहा हूँ
आग, ठंढे आंसुओं में भी होती है
फर्श पर गिरते ही भांप हो जाते हैं
क्यूंकि सबकी नजर से परे होते हैं
जब हम ये मोती रोते हैं
English And Hindi Poetry

दिल के आँसुओं से बने मोती,
मोतियों को सहेज एक एक कर,
माला में पिरोता गया हूँ,
बन न सकी, गले का हार
ये जयमाल छिपाता रहा हूँ
आग, ठंढे आंसुओं में भी होती है
फर्श पर गिरते ही भांप हो जाते हैं
क्यूंकि सबकी नजर से परे होते हैं
जब हम ये मोती रोते हैं