ईंट पत्थरों के नीचे दबा है ये दिल
चिनगारी सुलगे पर आग ना बनने पाए
हट जाए ये जो दिल का बोझ ये कभी
तो जले वो आग जो कभी ना बुझने पाए
English And Hindi Poetry
ईंट पत्थरों के नीचे दबा है ये दिल
चिनगारी सुलगे पर आग ना बनने पाए
हट जाए ये जो दिल का बोझ ये कभी
तो जले वो आग जो कभी ना बुझने पाए