हर कदम पे आंधी , और उठते तूफान
मैंने भी जीवन जीया है
मूक आंसुओं की चुभन, या खालीपन के तीर
मैंने भी स्वयं संघर्ष सहा है
रोशनी से दूर, अंधेरी गलियों के रास्तों मे
जब चलना हो लाजिमी
धुंधले रास्ते हों, पर बढ़ना हो जरूरी
मैंने पथ प्रज्वलित किया है
English And Hindi Poetry
हर कदम पे आंधी , और उठते तूफान
मैंने भी जीवन जीया है
मूक आंसुओं की चुभन, या खालीपन के तीर
मैंने भी स्वयं संघर्ष सहा है
रोशनी से दूर, अंधेरी गलियों के रास्तों मे
जब चलना हो लाजिमी
धुंधले रास्ते हों, पर बढ़ना हो जरूरी
मैंने पथ प्रज्वलित किया है