
पुरानी हवेली के बंद कमरे के कोने में एक अलमारी है
तह बना के वहां ख्वाब रख आए अरसा बीत गया था
आज उन्हें मैं बाहर निकाल लाया हूँ
ख्वाबों में गहरी सिलवटें पड़ गई थी
इस्तरी कर चुका हूं सबको
गहरी स्याही से अंधेरों में अब रोशनी लिख आया हूँ
English And Hindi Poetry

पुरानी हवेली के बंद कमरे के कोने में एक अलमारी है
तह बना के वहां ख्वाब रख आए अरसा बीत गया था
आज उन्हें मैं बाहर निकाल लाया हूँ
ख्वाबों में गहरी सिलवटें पड़ गई थी
इस्तरी कर चुका हूं सबको
गहरी स्याही से अंधेरों में अब रोशनी लिख आया हूँ