
गहरी स्याही से लिखी वो ख्वाहिशें
गुजरे सालों के बाद, फीकी दिख रही हैं
कुछ अंश बचे हैं, अभी मिटी नहीं हैं
ज़ेहन में बसे,इन हल्के अक्षरों की छाप
आज भी बहुत गहरी है
English And Hindi Poetry

गहरी स्याही से लिखी वो ख्वाहिशें
गुजरे सालों के बाद, फीकी दिख रही हैं
कुछ अंश बचे हैं, अभी मिटी नहीं हैं
ज़ेहन में बसे,इन हल्के अक्षरों की छाप
आज भी बहुत गहरी है