शाम के उस पार दरवाजों पे हुई ढेरों दस्तकों से आज कोई गिला नहीं
अपने सुकून के आगोश में हूँगा तो शाम ढले मुझे जगाना कभी नहीं
English And Hindi Poetry
शाम के उस पार दरवाजों पे हुई ढेरों दस्तकों से आज कोई गिला नहीं
अपने सुकून के आगोश में हूँगा तो शाम ढले मुझे जगाना कभी नहीं