
मिट्टी से ना बनाओ, अपने इरादों का स्तंभ
मौसम कल बदलेगा, तूफान, बारिश ना सह पाएंगे
टूट जाएंगे, बह जाएंगे
बिन इरादों के दिशाहीन कहलाओगे
छोटा सा ही सही, एक पक्का इरादा चिनो
ईंट पत्थर गारा फोलाद उसमे सब लगाओ
समय बदले, पर ये टिके और कायम रहे
और ले जाए, तुझे तेरी, मंज़िल के परे