
(इमारत के दरबान की जुबानी)
साहिब उतरा कार से
कूड़े दान से सट कुत्ता सो रहा था
किसी ने ना देखा गौर से
भूख से हताश, बेहोश हो रहा था
जाना जब, तब घर जा दो रोटी ले लाया
मुंह से बोला कूटर कूटर तो उसके कान भर खड़े हुए
फिर छुआ तो आँखें खुली, कुछ घबराया
साहिब को देखा हम ने आज रोटी खिलाते हुए
साहिब ने आज कमाल कर दिया
कुत्ते में वो नयी जान भर गया
बेहोश पड़ा कुत्ता, पूंछ हिलाते चल दिया
और एक सुख साहिब भी जी लिया