शाम से तुम्हारा नूर जो छा रहा है
चाँद बादलों के पीछे से शरमा रहा है
हुस्न जब खिल रहा है, इस महफिल में
एक तिलिस्म, है ये हर रोशनी के परे
English And Hindi Poetry
शाम से तुम्हारा नूर जो छा रहा है
चाँद बादलों के पीछे से शरमा रहा है
हुस्न जब खिल रहा है, इस महफिल में
एक तिलिस्म, है ये हर रोशनी के परे